धरा की चाहत जल समाया
छुपा है जीवन का साया।
कभी बूँद में, कभी धार में,
हर कण में बसे प्रभु का माया।
चरणों में तेरे गंगा बहती,
सिर पे हिमालय का छाया।
तू है धरती माँ की गोद,
तेरा आंचल सब पर साया।
सूरज की किरणों से सजता,
तारों की झिलमिल है तुझसे।
धरती की गोद में खिलता,
जीवन का हर एक हिस्सा।
बादलों की छाँव तले,
बिजली की लहरों में खेला।
बरखा की बूंदों में छिपा,
तेरा प्रेम अपार, है गहरा।
नदियों के संग-संग बहता,
सागर में मिल जाने का सपना।
धरती की चाहत है जल में,
जीवन का ये अनुपम गहना।
No comments:
Post a Comment