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Wednesday, 29 January 2025
दलदल पुरी धाम
दलदलपुरी धाम – एक जबरदस्त क़व्वाली
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे,
इहां के दर्शन से मिटथे सब भार हे...
(मुखड़ा)
चलो रे संगवारी, दलदलपुरी जाबो रे,
बाबा के चरण मं, शीश नवाबो रे...
सुख-समृद्धि बर, आस लगाबो रे...
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे...
(अंतरा १)
सदियों ले चमकत हे, इहां के जोतिया,
बाबा के किरपा से, होथे भलरिया...
भक्त मन अइंय, मनोकामना पाईंय,
खाली हाथ कोनो, इहां से नई जाईंय...
सत के राह दिखाथे, हे चमत्कारी बाबा,
अंधियार मिटाके, देथे उजियारा...
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे...
(अंतरा २)
मन के मैल धोथे, इहां के पानी,
जो एक बेर आय, बन जाथे दिवानी...
हाथ जोर के गाईंय, नाम तुम्हार बाबा,
सब दुख दरद दूर करथस दाता...
भक्त मन झूमें, बजावें ताली,
तेर झलक देखे बर, आंखी होवय निराली...
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे...
(अंतरा ३)
पर्व-त्यौहार मं, लागे भारी मेला,
जिहां ले आथें लोगन के रेला...
कीर्तन गूंजे, बजे ढोल-नगाड़ा,
सुन के भजन, हर लेथे दुख सारा...
बाबा के दुआ, सबो के काम बनाथे,
सच्चा सेवा करइया, सुख पाथे...
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे...
दलदलपुरी धाम के महिमा अपार हे,
इहां के दर्शन से मिटथे सब भार हे...
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