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Wednesday, 29 January 2025
दलदलपुरीन दाई जय हो
दलदलपुरीन दाई जय होवे, दलदलपुरीन माई जय होवे
(छत्तीसगढ़ी भक्ति गीत)
अंतरा 1:
दलदलपुरी के महिमा गावत, सगरी गा गांव कस्बा,
माई के किरपा बरसा झन, चमकै धरती अंबर।
जगत जननी, माई मोर, तुम ही हो सहारा,
कष्ट मिटा दव मइया, करहु बेड़ा पारा।
(कोरस)
दलदलपुरीन दाई जय होवे, दलदलपुरीन माई जय होवे,
मइया तोर किरपा बरसय, मन के कोना उजियार होवे।
अंतरा 2:
गऊ-माटी के सुगंध बिखरत, बइठे मंदिर द्वार,
चरण चूमें भक्त सबो, दे दे दया उपहार।
तोर सुगंधित गाथा गावत, गूंजे सारा गाँव,
भक्तन के मन हरषे, मिट जावय सबो दाव।
(कोरस रिपीट)
दलदलपुरीन दाई जय होवे, दलदलपुरीन माई जय होवे,
मइया तोर किरपा बरसय, मन के कोना उजियार होवे।
अंतरा 3:
नदिया के धार जस बहथस, तोर ममता के धार,
दुखवा हर लेथस मइया, देथस सुख अपार।
जोहार हे मइया, जोहार हे दाई,
तोर महिमा अमर रहय, जय जय दलदलपुरी माई।
(कोरस अंतिम बार)
दलदलपुरीन दाई जय होवे, दलदलपुरीन माई जय होवे,
मइया तोर किरपा बरसय, मन के कोना उजियार होवे।
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