Tuesday, 3 September 2024

ठंडी ठंडी हवाएं चलती हैं पहाड़ों के झरोखे से

ठंडी-ठंडी हवाएं चलती हैं पहाड़ों के झरोखे से पहाड़ों के बीचोंबीच नदियों के झरने बहते हैं। ठंडी-ठंडी हवाएं चलती हैं, मन को ये सुकून देती हैं। पेड़ों की सरसराहट में, प्रकृति की बातें कहती हैं।
झरनों की ये मस्ती, हर दिल को बहला देती है। चांदनी रात में जब, ये हवाएं गीत गाती हैं। ऊंचे-ऊंचे पर्वतों में, बसे हैं कितने राज छिपे। इन झरनों की नर्म धारा, हर गम को धो देती है। चलो चलें उस राह पर, जहां ये हवाएं बसी हैं। इनकी ठंडक में हम पाएं, हर खुशी, हर मिठास।

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